Homeन्यूज़What is CAA: सीऐऐ- सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट से जुडी सभी जानकारी-

What is CAA: सीऐऐ- सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट से जुडी सभी जानकारी-

What is CAA सीएए यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम 11 दिसंबर 2019 को भारत की संसद द्वारा पारित किया गया था।
इसमें तीन पड़ोसी देश (पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश) के उन अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जो लंबे समय से भारत में रह रहे है। इस कानून में किसी भी भारतीय वो किसी भी मजहब का हो उसकी नागरिकता छीनने का कोई भी प्रावधान नहीं है। भारत में रह रहे मुस्लिमों या किसी भी धर्म के लोगों की नागरिकता को इस कानून से कोई खतरा या परेशानी नहीं है।

बताया जा रहा है की भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार विवादित नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के नियमों को नोटिफाईड कर सकता है।

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बोला था कि सीएए को लोकसभा चुनाव से पहले सूचित किया जाएगा और बताया कि यह एक्ट किसी की नागरिकता नहीं छीनता क्योंकि इसमें ऐसे प्रावधान ही नहीं है।

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CAA पर क्यों हो रहा विवाद?

कुछ आलोचकों का मानना है (सीऐऐ) नागरिक संशोधन एक्ट में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से विशिष्ट धार्मिक समुदाय (हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी) को गैर कानूनी ढंग से उपनिवेश के लिए भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस पर कुछ लोगो का कहना है कि ये प्रावधान कुछ लोगो पर भेदभाव है, क्योंकि इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया है। जिसके कारण इस पर विवाद चल रहा है।

अभी भी CAA में मुस्लिमों को क्यों नहीं जोड़ा गया?

amit shah

केंद्र सरकार गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर संसद में बताया था कि निम्न मुस्लिम देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के नाम पर मुस्लिमों का उत्पीड़न नहीं होता है, जबकि इन देशों में हिंदुओं के साथ साथ अन्य समुदाय के लोगों को धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जाता है। इसलिए इन तीनो देशों के मुस्लिम वर्ग को नागरिकता कानून CAA में शामिल नहीं किया गया है। हांलाकि, इसके बावजूद भी वह लोग नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिस पर सरकार सोच समझ कर फैसला लेगी।

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नागरिकता किसे मिलगी ?

CAA लागू होने के बाद नागरिकता देने का प्रावधान पूरी तरह से केंद्र सरकार करेगी तथा जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आकर बस गए थे, उन्हें ही नागरिकता मिलेगी। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, बौद्ध, सिख, ईसाई, जैन और पारसी धर्म से जुड़े लोगो को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। सीऐऐ कानून के तहत उन लोगों को ग़ैरकानूनी प्रवासी माना गया है, जो कानूनी यात्रा दस्तावेज पासपोर्ट या वीजा के बगैर घुस आए हैं या फिर कानूनी दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हैं, लेकिन तय हुए समय से ज्यादा समय तक यहां रुके हुए हों।

नागरिकता आवेदन कैसे करें

नागरिकता आवेदन को लेकर एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा चुका है, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही रखी गई है। जिसे नागरिकता पाने के लिए आवेदकों को अपना वह साल बताना होगा जब वे बिना दस्तावेज के भारत में आये थे। आपसे से किसी तरह का दस्तावेज नहीं लिया जाएगा। नागरिकता पाने वाले लोगो को सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन करना है। जिसके बाद गृह मंत्रालय आवेदन की जांच करेगा और आवेदक को नागरिकता दे दी जाएगी।

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